ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

जीवन फिर से सभी का सुधर जाएगा

खोफ का जो बसा मन में मंजर तेरा रख होंसला तू डर बिखर जाएगा

है हवा में जेहर बरपा कैसा केहर

रख सुरक्षा का ध्यान रोग डर जाएगा

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

जज्बा जीना का जब दिल में आकर बसे

यम भी चोकठ पे आके मुकर जाएगा

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

काली रात के साए से डरना नही

कल तेरे आँगन सूरज उबर आएगा

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

जिन्दगी मौत के बीच जंग है छिड़ी,

रख हिमत तू जीत के घर आये गा

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

गम न कर पत्ते पतझड में टूट गिरे

फिर बसंत आएगा पेड़ सवर जाएगा

ये गुजर जाएगा पल गुजर जाएगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।