जब याद तुम्हारी आती है

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब याद तुम्हारी आती है मेरा जी भर भर आता है,

मैं पल पल तुम्हे भुलाती हु तुम आते हो मुस्काते हो,

मुस्काकर फिर छिप जाते हो क्या यही तुम्हे सुहाता है,

ये कैसी यह निस्ठुरता है हाय कैसी यह बेदर्दी है,

या यह क्रंदन भी झूठ है जो तुम तक पहुच न पता है,

जब याद तुम्हारी आती है..................

हे प्रीतम प्रानाअधार हरे हे मोहन नन्द कुमार हरे,

एक बार तो आकर अपनालो अब तुम बिन रहा न जाता है,

जब याद तुम्हारी आती है..................

न कोई अपना है जग में न कोई पराया लगदा है,

इस दासी का तो बस केवल एक श्याम तुम्ही से नाता है,

जब याद तुम्हारी आती है .....................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।