शाम जम्मया कइया दा दिल कंबिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

शाम जम्मया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

मोर मुकुट माथे तिलक विराजे

गल बैजंती माला साजे

श्याम मखना नाल रजया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

माता देवकी ने लाला जाया

वासुदेव जी ने टोकरे पाया

यमुना लंगिया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

बाबा नन्द दे बजन शनाइया

सारिया सखिया देन बधाइयाँ

शाम जम्मया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

राधा माधव सुन्दर जोड़ी

श्याम है काला ते राधा गोरी

श्याम राधा नाल मंगिया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

देवी देवता श्याम नु वेखन आये

नाले गीत ख़ुशी दे गाये

श्याम पलने दे विच सजया कइया दा दिल कंबिया

कइया दे दुःख दूर हो गए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।