मैं जोगन बन के नाचू गी तू देदे भोले साथ मेरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

की लेना दुनिया से भोले धर दे सिर पे हाथ तेरा

मैं जोगन बन के नाचू गी तू देदे भोले साथ मेरा

माँ बापू का बचपन में ही उठ गया था साया

जिस का थामा हाथ भोले उसे नही था ठुकराया,

बैठ गई मैं खा के धोखा फेर लगाया ध्यान तेरा

मैं जोगन बन के नाचू गी तू देदे भोले साथ मेरा

कोई न मेरा दुनिया में बस एक तेरा ही सहारा

तेरी जोगन हो गई भोले कर दे पार किनारा

घनी सता ली दुनिया ने भोले टूट गया विस्वाश मेरा

मैं जोगन बन के नाचू गी तू देदे भोले साथ मेरा

तेरी शरण में आ गई भोले आगे तेरी मर्जी

सचा से तेरा प्यार यो भोले सारी दुनिया फर्जी

संसार सारा न्यारा हो गया भोले आज के बाद तेरा

मैं जोगन बन के नाचू गी तू देदे भोले साथ मेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।