मत कर तू अभिमान रे बंदे जूठी तेरी शान रे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मत कर तू अभिमान रे बंदे, जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥

तेरे जैसे लाखों आये, लाखों इस माटी ने खाए ।

रहा ना नाम निशान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥

माया का अन्धकार निराला, बाहर उजला अन्दर काला ।

इस को तू पहचान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥

तेरे पास हैं हीरे मोती, मेरे मन मंदिर में ज्योति ।

कौन हुआ धनवान रे बंदे, मत कर तू अभिमान ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।