मैया की लाल चुनरी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

लाल चुनरी गोटेधार चुनरी

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

सत युग में माँ जन्म लिया है शक्ति माँ कहलाई

भोले संग में व्याह रच्या हवन में गई समाई

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

द्वापर में माँ जन्म लिया है द्रोपती माँ केहलाई

पांड्वो संग में व्याह रचाया जुए में गई समाई

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

त्रेता में माँ जन्म लिया है सीता माँ केहलाई

राम के संग में व्याह रचाया वन में गई चुराई

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

कलयुग में माँ जन्म लिया है वैष्णो माँ कहलाई

भेरो बाबा पीछे पड गए गुफा में गई समाई

ओडी ओडी रे मैया जी ने लाल चुनरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।