अच्युतम केशवम

दक्ष गोथरवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम ,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम ,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

कौन कहता है भगवान आते नहीं,

तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं,

कौन कहता है भगवान आते नहीं,

तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,

बैर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ,

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,

बैर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम ,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,

मां यशोदा के जैसे सुलाते नहीं,

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,

मां यशोदा के जैसे सुलाते नहीं,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लम ,

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,

गोपियों की तरह तुम ना चाहते नहीं,

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,

गोपियों की तरह तुम ना चाहते नहीं,

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम

राम नारायणम जानकी वल्लम

नाम जपते चलो काम करते चलो

हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो

नाम जपते चलो काम करते चलो

हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम

राम नारायणम जानकी वल्लम

याद आएगी उनको कभी ना कभी

कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी

याद आएगी उनको कभी ना कभी

कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम

राम नारायणम जानकी वल्लम

राम नारायणम जानकी वल्लम

राम नारायणम जानकी वल्लम

स्वर - दक्ष गोथरवाल

संगीत - विजय गोथरवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।