एक आँख में सूरज सधा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

एक आँख में सूरज साधा एक आँख में चंद्रमा आधा

दो आँखों में साध ली तूने इस जाग की मर्यादा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

कोई ना जाने इस दुनिया का कब तूने निर्माण किया

हे श्रीष्टि करता कब तूने जीवन का वरदान दिया

ना कोई समझा है यह अब तक ना समझेगा बाबा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

हम प्राणी है खेल खिलौने तू चाहे जैसे खेले

तेरी कृपा से लगे हुए है यह जीवन के मेले

कैसे चले हम सीधे पाठ पे तू हमको बतला जा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओ मेरे भोले बाबा ओ शंकर भोले बाबा

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

ओम नमः शीवाए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।