साँवरा बेगो आजा रै

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी,

आकर धीर बंधा जा रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

नैया बीच भँवर में डौले,

डगमग खावे है हिचकोले,

तू आकर पार लगा जा रे,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

भरी सभा में दौपदी हारी,

तन्ने बढ़ा दी उसकी साड़ी,

भगत की लाज बचा जा रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

खीचड़ करमा को गटकायो,

साग विदुर घर तन्ने खायो,

भगत को मान बढ़ा जा रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

नरसी भगत को मान बढ़ायो,

भात भरण ने दौड़यो आयो,

खजाना खूब लुटाया रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

सखा ने करदी आन में देरी,

बाँकी किस्मत ऐसी फेरी,

कुटिया ने महल बनाया रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

मैं भी भटक्यो मारो मारो,

इबतो मिलग्यो तेरो द्वारो,

तेरी जयकार लगावां रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

मन्ने एक आसरो तेरो,

जग में और कोई ना मेरो,

उमेश की लाज बचा जा रे,

म्हे बाट उडीका तेरी,

साँवरा बेगो आजा रै,

म्हे बाट उडीका तेरी।

आकर धीर बंधा जा रे,

म्हे बाट उडीका तेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।