पुरब से जब सुरज निकले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पुरब से जब सुरज निकले,

सिंदूरी घन छाये

पवन के पग में नुपुर बाजे,

मयुर मन मेरा गाये

मन मेरा गाये

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

पुष्प की माला थाल सजाउँ,

गंगाजल भर कलश मैं लाउँ

नौ ज्योती के दीप जलाउँ,

चरनों में नीत शीश झुकाउँ

भाव विभोर होके भक्ति में

रोम रोम रंग जाये

मन मेरा गाये

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

अभ्यंकर शंकर अविनाशी,

मैं तेरे दर्शन की अभिलाषी

जन्मों से पूजा की प्यासी,

मुझ पे करना कृपा जरासी

तेरे सिवा मेरे प्राणों को

और कोई ना भाये

मन मेरा गाये

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

ओम नमः शिवाय॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।