अपना मुझे बना लो मेरा और ना सहारा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अपना मुझे बना लो, मेरा और ना सहारा

चरणों से दूर रहकर, कैसे करूँ गुज़ारा

दिल की किसे सुनाएँ ख़ुदग़र्ज़ यार सारे

जिसको भी अपना समझा उसने ही ताने मारे

सुन भी लो अब कन्हैया कोई नहीं हमारा

खुशियाँ थी जिनसे बाँटी ऐसा भी मोड़ आया

ज़ख़्मों पे जख्म देकर दिल को बहुत रुलाया

तेरे होते मैं कन्हैया फिरता हूँ बेसहारा

मेरी जिंदगी कन्हैया अब है तेरे भरोसे

दुनिया मेरी तुम्ही हो तू ही तो पाले पोशे

दीपक है आस तेरी तुझको ही है पुकारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।