कैसे पाता मैं तुमको कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कैसे पाता मैं तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते,

रिसते रहते मेरे घाव दिल के,

आप जो बनके मरहम ना मिलते,

कैसे पाता मै तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते

बस तेरी एक नजर से ही हमको,

जो थे बिछड़े हमारे मिले है,

बेसहारा था जीवन जो उसको,

जिंदगी के सहारे मिले है,

अपनी आँखों में लेकर के आंसू

खाटू में तुमसे जो हम ना मिलते,

रिसते रहते मेरे घाव दिल के,

आप जो बनके मरहम ना मिलते,

कैसे पाता मै तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते

उनका एहसान मैं मानता हूँ,

रात दिन डर था जिनका सताता,

वो सितमगर सितम जो ना करते,

तेरी चौखट पे मैं कैसे आता,

सिलसिला साँसों का टूट जाता,

मेरे हमदम जो उस दम ना मिलते,

रिसते रहते मेरे घाव दिल के,

आप जो बनके मरहम ना मिलते,

कैसे पाता मै तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते

आत्मा मेरे तन में रही पर,

तुझमे धड़कन मेरी खो गई है,

रोती आँखों को तूने हंसाया,

साँवरे बात सच हो गई है,

तू पकड़ता ना मेरी कलाई,

नैन मेरे जो ये नम ना मिलते,

रिसते रहते मेरे घाव दिल के,

आप जो बनके मरहम ना मिलते,

कैसे पाता मै तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते

सोचकर के सहम जाता हूँ मैं,

जो ये चौखट तुम्हारी ना मिलती,

अश्क में डूबी रहती ये आखें,

फूल जैसी कभी भी ना खिलती,

बेधड़क दुःख हजारों ह्रदय को,

और सुख जो बहुत कम ना मिलते,

रिसते रहते मेरे घाव दिल के,

आप जो बनके मरहम ना मिलते,

कैसे पाता मै तुमको कन्हैया,

इस ज़माने से जो गम ना मिलते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।