तेरे संग नाचे गे गाये गे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे संग नाचे गे गाये गे हो मेरे कृष्ण कन्हिया रे

सारी दुनिया को साथ नचायेगे हो मेरे कृष्ण कन्हिया रे

तिर्शी नजरियाँ मुकट सुहाना तोरा कन्हिया जग है दीवाना

मस्ती में मस्त बनायेगे हो मेरे कृष्ण कन्हिया रे

धरती गगन और नाचे गे सितारे रंग बरसाएगे भगत प्यारे

ढोल मंजीरे बजायेगे हो मेरे कृष्ण कन्हिया रे

मदन मोहन कोई कृष्णा बुलाये रघु नाथ पूनम नोतुरा गाये

सरजीवन से महिमा लिखायेगे

हो मेरे कृष्ण कन्हिया रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।