माँ शेरावाली कृपा करो एक बार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तीन लोक चौदह भवन मैंने देखा सब संसार,

सबसे ऊँचा सबसे न्यारा है तेरा दरबार,

मां शेरावाली कृपा करो एक बार,

आया हूं तेरे द्वार मां सुन ले पुकार,

माँ शेरावाली, कृपा करो एक बार

कोई नहीं है मेरा सहारा,

नजरें करम का करदे ईशारा,

यहाँ मतलब का सब संसार,

मेरा जीना हुआ है दुश्वार,

माँ शेरावाली, कृपा करो एक बार

जनम जनम की प्यास बुझा दे,

तरसे ये नैनां दरस दिखा दे,

तेरा कब से करूं मैं इंतजार ,

मुझे दे दे माँ अपना प्यार,

माँ शेरावाली, कृपा करो एक बार

छोड़ भी दे अब आँख मिचोली,

खाली पड़ी है माँ मेरी झोली,

करदे जरा सा उपकार,

मैं तो हो गया अब लाचार,

माँ शेरावाली, कृपा करो एक बार

माँ इस लाल की आस ना टूटे,

हरगिज ये विश्वास ना टूटे,

माँ बिगड़ी मेरी भी तू सँवार,

तुझे कहते हैं सच्ची सरकार,

मां शेरावाली कृपा करो एक बार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।