सारी दुनिया को भेजी तूने चिठिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बोलदे माँ बोलदे मेरे सामने तू भेद सारे खोल दे

क्यों दरबार न बुलाया मुझे

सारी दुनिया को भेजी तूने चिठिया क्यों समजा पराया माँ मुझे

तेरी ज्योत मैं जगाऊ दिन रात माँ

तेरे नाम से शुरू हो मेरी बात माँ

तो काहे को बुलाया माँ मुझे

सारी दुनिया को भेजी तूने चिठिया क्यों समजा पराया माँ मुझे

तेरी याद मुझे रोज ही रुला गई राहे तक तक आखे धुंदला गई

क्यों इतना रुलाया माँ मुझे

सारी दुनिया को भेजी तूने चिठिया क्यों समजा पराया माँ मुझे

लेते बच्चो की बलाए माये प्यार से

देती बच्चो को दुआए माये प्यार से

क्यों गले न लगाया माँ मुझे

सारी दुनिया को भेजी तूने चिठिया क्यों समजा पराया माँ मुझे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।