माँ भारती की स्वर्णिम माटी हमें है चंदन

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माँ भारती की स्वर्णिम माटी हमें है चंदन,

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन,

मेरे अवध की सरयू श्रीराम को बुलाती,

मथुरा में मातु यमुना कान्हा के गीत गाती,

कभी राम इसमे खेले कभी खेले नन्द नंदन

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन

राजेंद्र,शालिवाहन, न्रूप दिगजयी हुए थे,

गोविंद प्रताप शिवबा, धर्मार्थ रण में झुझे,

कभी लक्ष्मीबाई झूझी , कभी टोपे क्रांति नंदन,

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन

गरजी थी वेद वाणी, ऋषिवर दया से मुखरित,

गूँजी विवेक वाणी, गुरु रामकृष्ण प्रेरित,

फैला दिशा दिशा में, अध्यात्म मन्त्र चिंतन,

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन,

केशव ने स्वप्न देखा, मधु ने उसे संवारा,

हिन्दुत्व मन्त्र प्रगटा, सब ने उसे बढ़ाया,

फैली यह संघ सरिता, दिश दिश किया है सिंचन,

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन,

माँ भारती के सुत हैं सारे समाज बंधु,

हर वर्ग बन्धु बन्धु हिन्दु समाज सिन्धु,

एकात्मता के बल पर समरस यहाँ है जीवन,

माटी हमारी पूजा, माटी हमें है वंदन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।