ना लेकर कुछ आया रे बन्दे ना लेकर कुछ जायेगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना लेकर कुछ आया रे बंदे ना लेकर कुछ जायेगा

ना लेकर कुछ आया रे बंदे ना लेकर कुछ जायेगा,

भज गोविन्दम मूढ़मते हरि भक्ति काम ही आयेगा,

ना लेकर...........

झूठी शान और कंचन काया अपनी जिसपे नाज़ किया,

डोर साँस की जैसे टूटी तू मिट्टी कहलायेगा,

ना लेकर ..........

धन संपदा महल अटारी मर जर के जो खड़ा किया,

कुछ भी साथ न जाने वाला हाथ पसारे जायेगा,

ना लेकर........

रिश्ते बंधन सब झूठे हैं इस माया की नगरी में,

जिसको तू अपना समझा था इक दिन वहीं जलायेगा,

ना लेकर.............

इस धरा का इस धरा पे सब धरा रह जायेगा,

भज ले मुरख हरि को अब तो हरि की भक्ति पायेगा,

ना लेकर..........

हरि नाम कलिकाल कलप तरु,

झोली भर हरि सुमिरन से,

चार लाखि चौरासी भव,

हरि सुमिरन पार करायेगा,

ना लेकर............

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।