श्री राम जपो रघुवंश मणि

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री राम जपो रघुवंश मणि, मिट जाए तीनो ताप

काल काँपे, जम थरथरे, ऐसा है नाम प्रताप

भज राम सिया मूरख जिया,

अइसन सुन्दर देहिया बार बार ना मिली,

बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली

भज राम सिया मूरख जिया,

अइसन सुन्दर देहिया बार बार ना मिली,

बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली

भज राम सिया मूरख जिया,

अइसन सुन्दर देहिया बार बार ना मिली,

बिना भजन के बेडा पार ना लगी

जिंदगी की आस नइखे कईले भजनीया,

माया के बाजार में एक दिन छूट जाई दुनिया

छूट जाई दुनिया छूट जाई दुनिया

राम नाम का दिया, बारे अपने हिया,

कबहुँ जीवन पथ में अंधियार ना मिली ,

बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली

भज राम सिया मूरख जिया,

अइसन सुन्दर देहिया बार बार ना मिली,

बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।