सांवरिया मोरी नैया तरा दे

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरिया मोरी नैया तरा दे,

नैया तरा दे पार लगादे,

नंद नाई सदन कसाई,

भई मस्तानी मीरा बाईं,

ऐसा ही मुझे मस्त बनादे,

साँवरिया मोरी नैया तरा दे,

नैया तरा दे पार लगादे

द्रुपद सुता के चीर बढ़ाओ,

गज के आकर फंद छुड़ाओ,

ऐसा ही मुझे रूप दिखादे,

साँवरिया मोरी नैया तरा दे,

नैया तरा दे पार लगादे,

मोह के बस में अर्जुन आया,

रूप विराट से हर ली माया,

ऐसा ही मुझे रूप दिखादे,

साँवरिया मोरी नैया तरा दे,

नैया तरा दे पार लगादे,

सांवरिया मोरी नैया तरा दे,

नैया तरा दे पार लगादे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।