मजधारा मैं छोडके नायीया ओ मेरे लक्ष्मण भैया तुम्हे क्या हो गया है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

चाल मझधार में छोड़ के नैया,

ओ मेरे लक्ष्मण भैया तुम्हें क्या हो गया है

वन में अकेली लकड़ी कैसे जलेगी लक्ष्मण भैया रे

सूर्य ऊगने को आए अभी नहीं आए बजरंग बाला रे

मेरी किस्मत टूटी फूटी ओ भी कहां जा बैठी

तुम्हें क्या हो गया है

मझधार में छोड़ के नैया ओ मेरे लक्ष्मण भैया

तुम्हें क्या हो गया है.

अयोध्या में भरत रोवे लंका में रोवे सीता नारी रे

मैं तो यहां रोए देख मुरझाए कृपा तेरी रे

वानर दल सब शौक मनाए दुश्मन खुशी मनाए

तुम्हें क्या हो गया है

मझधार में छोड़ के नैया ओ मेरे लक्ष्मण भैया

तुम्हें क्या हो गया है.

कैकैई कौशल्या सुमित्रा रोएगी ओ तीनो मैया रे

पूछेगी हमसे वो क्यों नहीं आए लक्ष्मण भैया रे

होगा झगड़ा करेगी दुखड़ा कैसे बताएं मुखड़ा

तुम्हें क्या हो गया है

मझधार में छोड़ के नैया ओ मेरे लक्ष्मण भैया

तुम्हें क्या हो गया है.

कहते हैं गंगादास। दिया भाई ने धोखा रे

अरे ओ लक्ष्मण भैया तुमने लिया ए मौका रे

वन वन फिरना पिता का मरना सती सिया का हरना

तुम्हें क्या हो गया है

मझधार में छोड़ के नैया ओ मेरे लक्ष्मण भैया

तुम्हें क्या हो गया है.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।