सखी री छैल बिहारी से निगोड़ी लड़ गयी अँखियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सखी री छैल बिहारी से निगोड़ी लड़ गयी अँखियाँ

सखी री छैल बिहारी से,

निगोड़ी लड़ गयी अँखियाँ,

मनाई लाख ना मानी,

छिछोरी लड़ गयी अँखियाँ,

सखी री छैल .........

निरखि सखी रूप मोहन का,

दमकती रह गयी अँखियाँ,

श्याम मिलि श्यामल बन जाऊं,

तरसती रह गयी अँखियाँ,

सखी री छैल........

वह छैला कर गया जादू,

कि तकती रह गयी अँखियाँ,

चलाई बान नैनन से,

जिगर में गड़ गयी अँखियाँ,

सखी री छैल............

चहुँ दिसि ठौर ना मोहें,

सखी कैसे कहाँ जाऊँ,

फिरूँ में बाँवरी बनकर,

कि पीछे पड़ गयी अँखियाँ,

सखी री छैल............

भले भव सिंधु में भटकूँ,

मनोहर छवि ना बिसरेगी,

दिवानी मीरा के जैसे,

हृदय में जड़ गयी अँखियाँ,

सखी री छैल.........

भजन रचना: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।