जननी मैं न जीऊँ बिन राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जननी मैं न जीऊँ बिन राम,

राम लखन सिया वन को सिधाये गमन,

पिता राउ गये सुर धाम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम।

कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि,

बसिये न वाके ग्राम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम,

प्रात भये हम ही वन जैहैं,

अवध नहीं कछु काम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम,

तुलसी भरत प्रेम की महिमा,

रटत निरंतर नाम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम

राम लखन सिया वन को सिधाए,

राउ गये सुर धाम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम

कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि,

बसिये ना वाके ग्राम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम

प्रात भये हम ही वन जैहैं,

अवध नहीं कछु काम

जननी मैं न जीऊँ बिन राम

तुलसी भरत प्रेम की महिमा,

रटत निरंतर नाम,

जननी मैं न जीऊँ बिन राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।