माता के द्वार पर जाओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माता के द्वार पर जाओ चाहे नाम जपो घर बैठे

माँ सुनती है मन की बोली

करो याद कही पर बैठे

माता के द्वार पर जाओ चाहे नाम जपो घर बैठे

शुद वान गंगा का जल श्री चरणों से बेहता बेहता

अर्ध्कवारी से दरबार का आधा रस्ता रेहता

हाथी मथे की पथरीली कठिन चडाई सेहता

माँ के पास पोंछ जाए राही जय माता की केहता

सिर उसका रहे सदा उचा आंबे जिसके सिर बैठे

माता के द्वार पर जाओ चाहे नाम जपो घर बैठे

यु तो वैष्णम माँ का है पर्वत उपर डेरा

लेकिन मैया करते अपने भगतो बीच बसेरा

झोली भरती विपदा हरती करती दूर अँधेरा

बिन बोले भी ध्यान उसे रेहता है तेरा मेरा

माँ उसकी भूल को बक्शे कोई भुला अगर कर बैठे

माता के द्वार पर जाओ चाहे नाम जपो घर बैठे

बच्चो को माँ प्यारी लगती माँ को बच्चे प्यारे

नेह लगाये कंठ लगाये सब की और निहारे

आँखों में आंसू लेकर क्यों मन से उसे पुकारे

करने को दुःख दूर स्वयम आ जाती उसके द्वारे

जो माता की जय बोले उनको न कोई दर बैठे

माता के द्वार पर जाओ चाहे नाम जपो घर बैठे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।