तुमसे मिली खुशिया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तुमसे ही मिली खुशिया तुम से जिंदगानी है,

जो कुछ भी हु मैं गुरुवर तेरी मेहर वाणी है

तुमसे ही मिली खुशिया तुम से जिंदगानी है

कभी सोचा न था मैंने तूने वो कर डाला

तुने मेरे जीने का अंदाज बदल डाला

तेरी महिमा गाई तो पेहचान ये पाई है,

जो कुछ भी हु मैं गुरुवर तेरी मेहर वाणी है

सुना मेरा जीवन था तू बन के बाहार मिला

मेरी नाव् भव्र में थी बन के पतवार मिला

पेहले गम के आंसू से अब खुशिया आई है

जो कुछ भी हु मैं गुरुवर तेरी मेहर वाणी है

तूने ज्ञान जगाया है भगती भी जगाई है

हम भगतो की तूने तकदीर बनाई है

तेरी शरण में रेहना तुमसे प्रीत लगाई है

जो कुछ भी हु मैं गुरुवर तेरी मेहर वाणी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।