जय महाकाल

दीपक भिलाला
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय महाकाल जय महाकाल

जय महाकाल जय महाकाल

जो पाप ताप का हरता है, जो युग परिवर्तन करता है,

मां आदि शक्ति को साथ लिए, जो बदल रहा है सृष्टि चाल ,

जिसने सोतो को जगा दिया, जगों को जिसने चला दिया,

चलतो को जिसने दौड़ाया, निष्ठा को दी प्रेरक उछाल ,

छल, द्वेष, दंभ को दूर करो, सद्कर्मों का उत्थान करो,

सब भेद विषमता नष्ट करो, है दुष्ट विनाशक महाज्वाल,

आओ देवत्व जगाने को, धरती को स्वर्ग बनाने को,

अपनत्व सभी में विकसा दो, है सज्जन के मानस मराल,

सद्भाव और सद्ज्ञान भरो, सत्कर्मों का उत्थान करो,

प्रज्ञा प्रकाश जग में भरदो उज्जवल भविष्य की के मशाल,

तुम हो अनादि तुम ही अन्नत, तुमसे प्रेरित यह दिगंदिगंत,

परिवर्तन के आधार तुम्ही, तुमसे प्रेरित यह जग विशाल,

स्वर - दीपक भिलाला

संगीत - विजय गोथरवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।