आजा भवानी एक बार मैं तो कब से खड़ा तेरे द्वार पर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आजा भवानी एक बार

मैं तो कब से खड़ा तेरे द्वार पर

आजा भवानी एक बार

अम्बे भवानी दुर्गे भवानी

मुझे आश चरण की

रख लेना मैया लाज हमारी

लागी लगन की

दर्शन तो दे दे एक बार

मैं तो कब से खड़ा हूँ तेरे द्वार पे ,

आजा भवानी एक बार

भेंट लिए मैं तो कब से खड़ा ,

हूँ द्वार पे तेरे

पूरण करदे मैया भवानी,

कारज मेरे

मुझको है तेरा एतबा

मैं तो कब से खड़ा हूँ तेरे द्वार पे

आजा भवानी एक बार।।

है जग दाती तेरे चरण की ,

धूल मिले जो

राजेन्द्र के घर खुशियों के मां,

फूल खिले जो

मिल जाये चेन करार

मैं तो कब से खड़ा हूँ तेरे द्वार पे,

आजा भवानी एक बार

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।