उड़ जाएगा हंस अकेला जग दर्शन का मैला

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

उड़ जाएगा हंस अकेला, जग दर्शन का मैला

छुटेंगे महल अटारी, छूटेगी दुनियादारी

कुटुंब कबीला छुटे-छुटे, बचपन दिन संग खेला रे

जैसे पात गिरे तरुवर के, मिलना बहुत दुहेला

ना जानू या किधर गिरेगा, लगे या पवन का रेला

जब होवे उमर पूरी, जब छूटेगा हुकुम हजूरी

जम के दूत बड़े मजबूत, जम से पड़ा झमेला

हर के कबीर गुण गावे, वह हर को परा पावे

गुरु की करनी गुरु जाएगा, चेला की करनी चेला

रचना - संत कबीर

स्वर - दीपक भिलाला

संगीत -विजय गोथरवाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।