जागो जागो शेरोवाली जागो मेहरावाली सवेरा हो गया है

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ माँ जागो जागो शेरावाली , जागो मेहरा वाली

सवेरा हो गया है, सवेरा हो गया है

फूट रही सूरज की लाली, जागो ज्योतोवाली

सवेरा हो गया है, सवेरा हो गया है

चहचाह रही चिडियो ने, छोड़ा माँ अपना बसेरा है

किरणे सुनहरी चमकी , कोयल ने दिल का तार छेड़ा है

ओ माँ पुष्प हार लाये वनमाली, जागो पहाडोवाली

सवेरा हो गया है, सवेरा हो गया है

गाते है गीत झरने, नदियों ने छेड़े माँ तराने है,

ठंडी पवन के झोंके, मन को तो लगते माँ सुहाने है

ओस डूबी है हरियाली, रात गयी मतवाली

सवेरा हो गया है, सवेरा हो गया है

आचमन कराती गंगा, मुख धो रहे हैं सिंधु सातो माँ

पूजन को आया लख्खा, जागो जागो जागो शेरोंवाली माँ

सजी आरती की है थाली, जागो भवनों वाली

सवेरा हो गया है, सवेरा हो गया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।