पिला दे साँवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पिला दे साँवरिया, अपने नाम की मस्ती ll

तेरे हवाले करदी मैंने ll,,

अपनी जीवन हस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll साँवरिया, अपने नाम की मस्ती ll

मैं तेरे चरणों में आया, "मन में लेकर आशा" l

जी भर मुझको पिला दे बाबा, "न जाऊँ मैं प्यासा" ll

दाम की मुझको, फ़िक्र नहीं है ll,,

मँहगी हो या सस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll साँवरिया, अपने नाम की मस्ती ll

हम ने सुन रखे हैं, "महखाने के ढंग निराले" l

श्याम बहादुर आलू सिंह, "पीकर हो गए मतवाले" ll

पिला मुझे भी तूँ मय ऐसी ll,,

पार लगेगी कश्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll साँवरिया, अपने नाम की मस्ती ll

यही है अरदास दास की, "तीन बाण के धारी" l

ऐसी मुझे पिला न उतरे, "पूरी उम्र ख़ुमारी" ll

बिना पिए न जाए बावरा ll,,

मिट जाए चाहे हस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll साँवरिया, अपने नाम की मस्ती ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।