आओं मेरी गलियन में घनश्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

नवशत साज-श्रृंगार चाव सु थारी बाट निहारु,

आओं तो करुणेश तेरों पथ, केश न संग बुहारू,

कर करके मनुहार अपन को, पद पद मन पे वारूँ,

चरण चिन्ह रज मल मल अपने, मस्तक भाग्य निखारुं,

नैना तरस रहे हैं मेरे, हे नयन अभिराम,

हे नयन अभिराम, हे नयन अभिराम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तुम दयालु हठ छोड़ो प्रीतम, मैं हूँ कर्मों की मारी,

पयाँ पड़ू अब मान भी जाओं, विनती कर कर हारी,

त्यागों मान यो रूप गुमानी, नटखट रसिक बिहारी,

तेरी सौ (कसम) नहीं तुम बिन दूजो, जा घर जाऊं पुकारी,

हरी तेरे चरणन की मैं, बिना दाम गुलाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

फंसी रहूँ तेरी माया नगरी, मेरा यही ठिकाना,

काम क्रोध संग प्यार प्यार हमारा, लाभ मोह का गाना,

भटक गयी हूँ, बीहड़ वन में, मुरली नेक बजाना,

अपनी समझ सम्भालों कान्हा (साजन), ओ गोकुल के कान्हा,

बजे मुरलिया, फिर से प्यार वही कदम की छावं,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

कब सुध सुधा स्वाद चाखेगी, ये बिरहन दुखियारी,

चन्दा के आँचल में कब ये छिपे रैन अंधियारी,

कब तू चरणन सु लिपटेगी, दासी हरी तुम्हारी,

कब उछ्वाव सो मन आँगन में नाचोंगे गिरधारी,

मैं तो संग संग नाचूंगी, यही बने श्रीधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तुम्हारे लिए इस दिल में कशिश आज भी बाकि हैं,

और मेरी ज़िन्दगी को तेरा इंतजार, आज भी बाकि हैं,

तुम चाहोगे एक दिन मुझे ये विश्वास आज भी बाकि हैं,

कब तक ना लगओंगे तुम मुझे गले, ये प्रश्न आज भी बाकि हैं,

मेरी नज़रों को तेरे दीदार की चाहत आज भी बाकि हैं,

हम तुम्हारे दिल में जगह पायेंगे, ये आस आज भी बाकि हैं,

प्यारे ये मेरी प्यास, ये मेरा विश्वास ये मेरी आस अधूरी ना रह जाये,

सब एक क्षण में पूरी हो जाये इसके लिए

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

मेरे मित सलोने, मेरे रसीय प्रीतम,

दर्पण सन्मुख बार-बार, जा-जाकर निज रूप निहारूं,

अलकें सवांरू, मांग भरू, नैनों में कजरा डारूं,

छीन छीन छीन मैं तो चढू री अटारी, पल पल पलकन पंथ बुहारूं,

कब आवे मेरे बिछुड़े प्रीतम, कब बांह गले में डारूं,

काश वो नगमें सुनाये ना होते,

तो उनको याद कर आँखों में आंसू आये ना होते,

जब इस तरह भूल ही जाना था हमकों, तो इस तरह दिल में समाये ना होते,

तो इतनी गहराई से दिल में समाये ना होते,

ये रोज़ सकस्त होने लगता हैं,

अपना दुखड़ा बेकार तुम्हारे सामने रोता हैं

अगर इन दुखड़ों को समाप्त करना चाहों तो,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

कृष्ण प्यारे, मेरे पी मतवारे, मेरी आँखों के तारे,

लोग पूछे राज ख़ामोशी का, वो राज बताये हम कैसे,

दिल में जो चुभती हैं हर पल वो बात बताये हम कैसे,

दिल कह देता दास्तान अपनी, गर दिल कोई जुबां होती,

अब दिल रोता हैं आँखों से, यव बात बताये हम कैसे,

सिकवा करें तो किस्से करे, मेरे उजड़े चमन के बागबान,

सिकवा करें तो किस्से करे, माली ही गुलशन छोड़ गया,

मौसम ने भी रुख मोड़ लिए, ये हाल सुनाये हम कैसे,

प्यारे ये झुकती आँखें और रूकती सांसे, दर्द अधुरा कहती हैं,

दिल की पूरी बातें अक्सर बस दिल में ही रहती हैं,

अगर तुम भी चाहते हो कि मैं दिल से खाली हो जाऊं,

तो कम से कम इन बातों को सुनने के लिए (भले ही ना मानना)

लेकिन सुनने के लिए

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

क्यूँ तुम्हें बुला रही हूँ प्यारे,

कुछ तो इन भावनाओं को तुम भी समझों,

तेरा मेरा रिश्ता क्या हो गया हैं प्यारे,

तुम्हारी दासी तो हूँ लेकिन तुमसे यारी भी हो गयी हैं मेरी, इसलिए

हरआ वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुक्ता वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

ला ला लाईया यारियां, जग सो ये न्यारियां,

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

रोज़ सवेरे यमुना ते जावा,

रोज़ सवेरे यमुना ते जावा,

यमुना ते जावा श्यामा यमुना ते जावा,

यमुना ते जावा, यमुना ते जावा,

रोज़ सवेरे यमुना ते जावा, आकर तू गागर चुकवा रे,

अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुरली वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

तेरी मेरी प्रीत पुरानी, तेरी मेरी प्रीत पुरानी,

प्रीत पुरानी श्यामा प्रीत पुरानी,

तेरी मेरी प्रीत पुरानी,

प्रीत की रीत निभाई रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुरली वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

देखों जब तुम नहीं आते हो तो,

लोग कि मैंनू देवड़ ताने,

लोग कि मैंनू देवड़ ताने, देवड़ ताने श्यामा देवड़ ताने,

लोग कि मैंनू देवड़ ताने,

लगिया तोड़ निभाई वे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

हारा वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुक्ता वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

ला ला लाईया यारियां, जग सो ये न्यारियां,

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुक्ता वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

तेरे जे हा होण सौणा न कोई, सौणा न कोई श्यामा सौणा न कोई,

तेरे जे हा होण सौणा न कोई, इसलिए

एक बार साढ़े घर आईवे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

एक बार साढ़े घर आईवे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

मुक्ता वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

हारा वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

ला ला लाईया यारियां, जग सो ये न्यारियां,

ला ला लाईया यारियां, जग सो ये न्यारियां,

कुण्डला वाला साढा साईं रे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

डगमग डगमग नैया डोले, बीच भंवर में खावे हिचकोले,

खावे हिचकोले, श्यामा खावे हिचकोले,

बीच भंवर में खावे हिचकोले,

आ के तू पार लगाई वे, अस्सा ला ला लाईया यारियां

अस्सा ला ला लाईया यारियां

ला ला लाईया यारियां, ला ला लाईया यारियां

प्यारे, जब मेरी तुझे यारी लग ही गयी,

और मैं तेरी दासी होकर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को उद्दत हो ही गयी तो

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व,

तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,

हे प्रीतम सुखधाम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,

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प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।