साँवरे घनश्याम तुम तो प्रेम के अवतार हो

रवी नंदन शास्त्री जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

संवारे घनश्याम तुम तो

प्रेम का अवतार हो

फस रहा हू संकटों में

तुम ही खेवन हार हो

संवारे लाडले तुम तो

संवारे घनश्याम तुम तो

प्रेम का अवतार हो

चल रही आँधी भयानक

भावर में नैया फासी

थाम लो पतवार गिरधर

तब ही बेड़ा पार हो

फस रहा हू संकाटो में

तुम ही खेवन हार हो

संवारे घनश्याम तुम तो

प्रेम का अवतार हो

आप का दर्शन हमे

इस छवि से बाराम बार हो

हाथ मुरली मुकुट सिर पेर

और गले में हार हो

फस रहा हू संकाटो में

तुम ही खेवन हार हो

सांवरे घनश्याम गिरधर

तुम तो प्रेम का अवतार हो

नंगे पग ताज के गरूँ को

दौड़ने वेल प्रभु

देखना निष्फल ना

मेरे आंशुओ की धार हो

फस रहा हू संकाटो में

तुम ही खेवन हार हो

हे सांवरे लाडले

सांवरे घनश्याम तुम तो

प्रेम का आधार हो

सांवरे घनश्याम तुम तो

प्रेम का अवतार हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।