लाल लाल चोल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लाल लाल चोला मैं लाई रे जाके मैया से केह दो,

जा पोंह्ची मैं जम्मू कटरे

पहाड़ो पे चढ़ के आई रे जाके मैया से केह दो

लाल लाल चोला मैं लाई रे जाके मैया से केह दो

लाल रंग आई गुलाबी रंग लाई

गुलाबी रंग आई गुलाबी रंग लाई

दिल्ली से गोटा लगवाई रे

जाके मैया से केह दो

लाल लाल चोला मैं लाई रे जाके मैया से केह दो

सब की माँ ने बिगड़ी बनाई,

मेरे लिए देर क्यों लगाई रे जाके मैया से केह दो

लाल लाल चोला मैं लाई रे जाके मैया से केह दो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।