मैईया लक्छमी आबू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैईया लक्छमी आबू बिगरल काज बनाबू

जे किश्मत के मारल मैया हुनकर भाग्य जगाबु

रत्ना कर स प्रगट भेलो माँ सागर सुता कहाबै छी

छीर समुंदर शेषनाग पर विष्णु क चरण दबाबै छी

सुर नर मुनि सब कहै ये मईया हमरा नै बिस्राबु।

मैईया लक्छमी आबू....

आहाँ बिन माँ तीनु लोक में काज सब रुईकी जाइये

यज्ञ हवन पूजन कीर्तन माँ दान नै भ पावईये

एक नजर फेरु हे मईया सब संकट के मिटा बु

मईया लक्छमी आबू......

प्यासा गाबे भजन आहाँ के गाबे नर और नारी

खुईल जाइ किश्मत हुनकर माँ जिनका पर आहाँ बलिहारी

सब के घर दीपावली के दिन छम छम करैत आबू

मैईया लक्छमी आबू...

हेमकान्त झा प्यासा

Hemkant jha प्यासा

9831228059

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।