अगर तुम में चोरी की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अगर तुम में चोरी की, आदत न होती ,

तो ब्रज में यूँ मोहन, बगावत न होती ,,

जो घर-घर में माखन, चुराया न होता ,

तो हर दिन तुम्हारी, शिकायत न होती,

जो माखन की मटकी, लुटाई न होती ,

यूँ घर-घर में चर्चा, कन्हाई न होती ,

अगर तुम में चोरी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*भला कौन कहता, तुम्हें चोर छलिया,

बिगाड़ी किसी की, अमानत न होती ,

ये हँसना हँसाना, ये मन का लुभाना ,

सभी भूल जाते, ये बातें बनाना ,

अगर तुम में चोरी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मज़ा तुम को चोरी का, मिल जाता मोहन,

गुजरिया में अगर जो, शराफत न होती ,

पकड़ के गुजरिया, तुम्हे कैद करती ,

नन्द की कचहरी में, फिर पेश करती,

अगर तुम में चोरी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तो दफा 457, तुम पे लगती ,

कसम से तुम्हारी, जमानत न होती ,

कभी चीर हरना, कभी लूट लेना ,

ये करम हैं तुम्हारे, किसे दोष देना ,

अगर तुम में चोरी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,

गुजरिया को झूठी, समझ लेते चेतन,

अगर तुम में ऐसी, शरारत न होती ,

अगर तुम में चोरी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।