सतगुरु केवटिया बण आवो नैया पार लगाओ जी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु केवट्या बण आवो, नय्या पार लगाओ जी,

पार लगाओ जी नय्या मेरी, पार लगाओ जी,

आप तारण उभारण हो दाता, माने क्यूं बिसरावो जी,

मैं तो चरण शरण अनुरागी, बंधन से मुक्त कराओजी,

लट भंवरा की सुणी बाता, मन में लागी खाताजी,

जन्म मरण का मेटो झगड़ा, माने तगड़ा बनाओ जी,

मोह ममता में बंधियो भारी, जीव चौरासी में त्यारी जी,

पारब्रह्म से जोड़ो माने, ब्रह्म ज्ञान सुणाओ जी,

जीव ब्रह्म का भेद मिटाओ, अद्वेत ब्रह्म लिखाओ ,

संशय सारो दूर भगावो, शरण में बिठाओ जी,

गोकुल स्वामी सतगुरु दाता, भिन्न-भिन्न कर समझाता,

लादूदास चरणा माहि, ज्ञान भाण उगावो जी ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।