श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल,

तुम बिन रह्यो न जाय हो ॥

बृजराज लडेतोलाडिले ॥

बंक चिते मुसकाय के लाल,

सुंदर वदन दिखाय ॥

लोचन तल पे मीन ज्यों लाल,

पलछिन कल्प बिहाय हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

सप्त स्वर बंधान सों लाल,

मोहन वेणु बजाय ॥

सुरत सुहाइ बांधिके नेक,

मधुरे मधुर स्वर गाय हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

रसिक रसीली बोलनी लाल,

गिरि चढि गैयां बुलाय ॥

गांग बुलाइ धूमरी नेंक,

ऊँची टेर सुनाय हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

दृष्टि परी जा दिवसतें लाल,

तबते रुचे नहिं आन ॥

रजनी नींद न आवही मोहे,

बिसर्यो भोजन पान हो ॥

दर्शन को यनुमा तपे लाल,

बचन सुनन को कान हो ।

मिलिवे को हीयरो तपे मेरे,

जिय के जीवन प्राण हों ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

मन अभिलाषा ह्वे रही लाल,

लगत नयन निमेष ॥

एकटक देखूं आवतो प्यारो,

नागर नटवर भेष हों ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

पूर्ण शशि मुख देख के लाल,

चित चोट्यो बाही ठोर ॥

रूप सुधारस पान के लाल,

सादर चंद्र चकोर हो ॥

लोक लाज कुल वेद की लाल,

छांड्यो सकल विवेक ॥

कमल कली रवि ज्यों बढे लाल,

क्षणु क्षणु प्रीति विशेष हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

मन्मथ कोटिक वारने लाल,

देखी डगमग चाल ॥

युवती जन मन फंदना लाल,

अंबुज नयन विशाल ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

यह रट लागी लाडिले लाल,

जैसे चातक मोर ॥

प्रेम नीर वर्षाय के लाल,

नवघन नंदकिशोर हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

कुंज भवन क्रीडा करे लाल,

सुखनिधि मदन गोपाल ॥

हम श्री वृंदावन मालती लाल,

तुम भोगी भ्रमर भूपाल हो ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..

युग युग अविचल राखिये लाल,

यह सुख शैल निवास ॥

श्री गोवर्धनधर रूप पें,

बलजाय चतुर्भुज दास ॥

श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।