कलयुग में एक बार कन्हैया ग्वाले बन कर आओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज- कसमें वादे प्यार वफ़ा सब,

कलयुग में एक बार कन्हैया ग्वाले बन कर आओ रे,

आज पुकार करे तेरी गइयाँ आके कंठ लगाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया

जिसको मैंने दूध पिलाया वोही मुझे सताते है,

चीर फाड़ कर मेरे बेटे मेरे मॉस को खाते है,

अपनों की अभिशाप से मुझको आके आज बचाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया......

काहे हम को मुक बनाया घुट घुट कर यु मरने को,

उसपर हाथ दिये न तूने अपनी रक्षा करने को,

भटक गई संतान हमारी रस्ता आज दिखाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया.....

चाबुक से जब पीटी जाऊ हाय हाय चिल्लाती मैं

उबला पानी तन पर फेंके। सहन नही कर पाती मैं

बिना काल मै तिल तिल मरती करुणा जरा दिखाओ रे

कलयुग में एकबार कन्हैया.....

एक तरफ तो बछड़े मेरे अन धन को उपजाते है,

उसी अन्न को खाने वाले मेरा वध करवाते है,

हर्ष जरा तुमआके वध पे आके रोक लगाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया....

हेमकान्त झा प्यासा।

9831228059

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।