मोरे कान्हा तोरी अँखियाँ जादूभरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरे कान्हा तोरी अँखियाँ जादू भरी

मोरे कान्हा तोरी अँखियाँ जादू भरी,

जब तें लड़ीे निगोड़ी मोरी अँखियाँ,

बेसुध विह्वल भई बाँवरी,

मोरे कान्हा तोरी.........

बहुत सतावत मन तड़पावत,

चहुँ दिसि पाछे पाछे ऑन परी,

मोरे कान्हा तोरी......

प्रेम सुधा रस भरी तोरे अंखियन,

बलि बलि जाऊं तोरे शरण परी,

मोरे कान्हा तोरी....

अंखियन बान दास भई घायल,

कलि कलुष भव सिंधु तरी,

मोरे कान्हा तोरी.........

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।