हट जा निंद्रा मोत बैरण मोहे साहिब ने रटवा दे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हट जा निंद्रा मोत बैरण मोहे साहिब ने रटवा दे ,

क्ई जन्म रा पाप कियोड़ा आज भजन से कटबा दे ,

इस काया में अमृत कुवा ,

भर भर प्याला पीबा दे,

इस काया में लंम्बा बड़,

कुबध्द बेल ने कटवा दे,

ज्ञान का गोला घट उर म लाग्या,

काल का बंधन कटवा दे

सत्य की कुंजी सुनन्न में लागी,

गुप्त ताला खुलबा दें,

लादू नाथ जगत में जागत जोगी

नींद घटे तो घटबा दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।