मैं बछड़ा भागा वाला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं बछड़ा भागा वाला

मैनु माँ ने कोल बुला लेया

मैं दूर दूर सी रेन्दा ,

मैनु माँ ने चरणी ला लेया

चिट्ठी भेज मैनु माँ ने बुलाया,

मेरे उत्ते कर्म कमाया

बाह फड़ के मेरी मात, वैष्णो

गोदी विच बिठा लेया

सिर राख्या चरणा दे उत्ते

भाग जाग पाएँ मेरे सुत्ते

मेहरावाली दे दर ते आके

रज रज दर्शन पा लेया

हथ प्यार दा माँ सिर धरया

खाली मेरा दामन भरया

शेरावाली दे दर ते उत्ते

जो मंगया सो पा लेया

जो करदे ने माँ दी सेवा

मेहर ओहना ते करदी ऐ देवा

कित्ती किरपा (नूर) दे उत्ते

अपना नाम जपा लेया

गायक एवम लेखक(ब्रमलीन महंत श्री देश बंधु नूर जी )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।