हरी नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरी नाम के रस को पी पी कर आनंद में जीना सीख लिया

आनंद में जीना सीख लिया,

आनंद में जीना सीख लिया,

आनंद में जीना सीख लिया,

प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में,

जाकर के पीना सीख लिया,

हरी नाम के रस को पी पीकर,

आनंद में जीना सीख लिया ॥

हरी नाम की मस्ती अनोखी है,

पी करके हमने देखी हैं,

सब चिंताओं को छोड़ के अब,

मस्ती में रहना सीख लिया,

हरी नाम के रस को पी पीकर,

आनंद में जीना सीख लिया ॥

पीकर के आनंद आता है,

यह झूठा जग नहीं भाता है,

तुम भी थोड़ी सी पिया करो,

यह सब से कहना सीख लिया,

हरी नाम के रस को पी पीकर,

आनंद में जीना सीख लिया ॥

हरि नाम में चूर जो रहते हैं,

माया से दूर वो रहते हैं,

हरी याद रहे हर पल हमको,

प्रभु नाम को जपना सीख लिया,

हरी नाम के रस को पी पीकर,

आनंद में जीना सीख लिया ॥

कहना यह चित्र-विचित्र का है,

मुश्किल से मिलता मौका है,

हरि नाम के पागल बन जाओ,

सब को समझाना सीख लिया,

हरी नाम के रस को पी पीकर,

आनंद में जीना सीख लिया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।