जीवन गवाने वाले जीवन क्यों व्यर्थ गवाए

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जीवन गवाने वाले जीवन क्यों व्यर्थ गवाए

प्रभु की शरण में क्यों ना आये,

काहे लुटाये तू समय अन्मुला

दोलत की मोह माया में मन तेरे डोला,

काहे भरा है तूने पापो का थैला

चोला है उजला दिल तेरा मैला,

ताकत की मध में बंदे दुखियो को काहे सताए,

प्रभु की शरण में क्यों ना आये,

किस के लिए करे तू हीरा फेरी

मिटटी का कोयला है ये काया तेरी

धरती पे आके तूने क्या है कमाया

संग न जाएगा तेरे तेरा ही साया

अपने ही पथ में पगले कहे तू कांटे बिछाए

प्रभु की शरण में क्यों ना आये,

अब भी समय है करले प्रबु की भगती

मिल जायेगे तुझको पापो से मुक्ति

गलती सभी वो तेरी माफ़ करेगा

खुशियों से तेरा वो आंचल भरे गा

दो दिन का है बसेरा काहे को तू भर माये

प्रभु की शरण में क्यों ना आये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।