मैंने श्याम को व्यथा सुनाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैंने श्याम को व्यथा सुनाई मेरा बन गया श्याम सहाई

मेरे सिर पे हाथ फिराया मुझे प्रेम से ये समजाय मैं हु न तू कैसी फिकर करे

अरे पगले तू काहे डरे

ऐसा दिन था आया समय ने खूब रुलाया,

कदम कदम पे ठोकर कोई न हाथ बडाया,

मेरी आँखे भर भर आई मेरा बन गया श्याम सहाई

मेरे सिर पे हाथ फिराया मुझे प्रेम से ये समजाय मैं हु न तू कैसी फिकर करे

अरे पगले तू काहे डरे

जीवन की बगिया में है फूल ख़ुशी के खिलते,

फूलो की मुस्कान में बाबा मुझको दिखते इतनी किरपा बरसाईं

मेरे सिर पे हाथ फिराया मुझे प्रेम से ये समजाय मैं हु न तू कैसी फिकर करे

अरे पगले तू काहे डरे

जिस दिन था दुद्कारा अब वो गले लगाये,

चोखानी ये संवारा क्या क्या खेल रचाए

मेरे मन में ज्योत जगाई

मेरा बन गया श्याम सहाई मेरे सिर पे हाथ फिराया मुझे प्रेम से ये समजाय

मेरे सिर पे हाथ फिराया मुझे प्रेम से ये समजाय मैं हु न तू कैसी फिकर करे

अरे पगले तू काहे डरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।