भोले बाबा ने ऐसा वजाया डमरू

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा ने ऐसा "वजाया डमरू-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया स ॥

सुन डमरू की आवाज़ ब्रह्मा चले

यहां ब्रह्मा चले वहां विष्णु चले

वहां लक्ष्मी का ॥, मन भी "मग्न हो गया-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

सुन डमरू की आवाज़ गंगा चले

यहां गंगा चले वहां यमुना चले

वहां सरयू का ॥, मन भी "मग्न हो गया-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

सुन डमरू की आवाज़ सूरज चले

यहां सूरज चले वहां चंदा चले

वहां तारों का ॥, मन भी "मग्न हो गया-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

सुन डमरू की आवाज़ कान्हा चले

यहां कान्हा चले वहां राधा भी चले

वहां सखिओं का ॥, मन भी "मग्न हो गया-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

सुन डमरू की आवाज़ गणपत चले

यहां गणपत चले वहां कार्तिक चले

वहां अम्बे का ॥, मन भी "मग्न हो गया-॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

रामा ने सुना लक्ष्मण ने सुना

माँ सीता का मन भी मग्न हो गया

भोले बाबा ने ॥, ऐसा "वजाया डमरू॥",

सारा कैलाश परबत मग्न हो गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।