पग पग पोरो पाप रो कलयुग में क्युं तड़पावो

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

पग पग पोरो पाप रो कलयुग में क्युं तड़पावो

रात में कुरनावे साँवरा मोरिया

नींद बैरण नहीं आय श्री हरि सम धान बताओ जी

श्री हरि सम धान बताओ जी

सतयुग त्रेता द्वापर मायने

प्रत्यक्ष थे होता तैयार,

कलयुग में यूँ क्यों तडपावो जी,

क्रोध बढ़ गो है साँवरा मोकाडो ,

प्रेम सूं करें नहीं कोई बात,

सद्बुद्धि हरि सबने दिरावो जी,

पग पग पोरो पाप रो कलयुग में क्युं तड़पावो

धर्मी तो बिलखे अपार भगतां री हरि सहाय करावो जी,

रात में कुरनावे साँवरा, मोरिया नींद बैरण नहीं आय,

अपणे स्वारथ कारणे घणा करे कूड़ा काम,

मिनखा में संतोष धरावो जी,

भाई रो भाई बैरी हो रहियो,

राखे नहीं दूध वाली लाज़,

ओ लोभ सारी कलह आ करावे जी,

रात में कुरनावे साँवरा मोरिया,

नींद बैरण नहीं आय,

श्री हरि सम धान बताओ जी

जीव जंतु कट चौवटे लागे आरी मिटटी री हाट,

म्हारो मनड़ो घणो दुख पावे जी,

दया और धरम घणा छोडिया,

नेकी माथे चाले घणा नाय,

श्री हरि रहम आप करावो जी,

रात में कुरनावे साँवरा, मोरिया,

नींद बैरण नहीं आय,

श्री हरि सम धान बताओ जी

भजन लिखे हैं लखन चौधरी,

स्वामी सुनीता सुर में गाय,

गिरधारी बेगा आप पधारो जी,

अरज करा म्हे हरी आपमें,

लेवो थे पाछो अवतार,

धरती रो सारो भार उतारो जी,

रात में कुरनावे साँवरा मोरिया,

नींद बैरण नहीं आय,

श्री हरि सम धान बताओ जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।