साडे घर जगराता झंडेया वाली ने औना ऐ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तू ढोल बजावे ढोलिया अज पौनिया ने बोलियाँ

बोलियाँ दे विच मैं दा नाम ध्योना ऐ,

साडे घर जगराता झंडेया वाली ने औना ऐ,

झंडेया वाली ने औना ऐ मेरी दाती ने औना ऐ,

सब महंता दी मंडली ने आदि गणेश मनाये ने

दुरो दुरो भगत प्यारे भेटा लैके आये ने

तरकेया वाहन देव्तेया दा शीश झुकाउना इ

साडे घर जगराता झंडेया वाली ने औना ऐ,

झंडेया वाली ने औना ऐ मेरी दाती ने औना ऐ,

माँ दे नाम दा हथ कलावा मथे टिके लाये ने

जग मग जगदी ज्योत नुरानी खुले दर्शन पाए ने

माँ दे सोहने चरना विचो सब सुख पौना इ

साडे घर जगराता झंडेया वाली ने औना ऐ,

झंडेया वाली ने औना ऐ मेरी दाती ने औना ऐ,

रवि जयपुरिया भेटा गावे ढोलक छैने वजदे ने

ढोली ढोल बजा तू दबके भगत प्यारे न्च्दे ने

पन्ने ने भी नच नच माँ दा शुकर मनाउना इ,

साडे घर जगराता झंडेया वाली ने औना ऐ,

झंडेया वाली ने औना ऐ मेरी दाती ने औना ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।