शरदा के फूल चडाते चलो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शरदा के फूल चडाते चलो ये है गंगा नहाते चलो

तन ये दोबरा मिले न मिले जीवन को पावन बनाते चलो

ये है गंगा नहाते चलो .....

इस ने तारे लोबी डोंगी रिश्री मुनियों को तारा

पाप हारनी मोक्ष तारनी इस की निर्मल धारा

अमृत है माथे लगाते चलो

ये है गंगा नहाते चलो ....

ब्रह् सुता गंगा कल्याणी बागी रथी संग आई

गो मुख से गंगा सागर तक धारा बन लहराई

घट घट पे दीप जलाते चलो

ये है गंगा नहाते चलो

अंत समय तन राख में मिल के जब गंगा तट आये

ममता के आँचल में उसको गंगा गोद सुलाए

इस दर पे शीश निभाते चलो

ये है गंगा नहाते चलो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।