मन भज गोविन्दम हरे हरे

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मन भज गोविन्दम हरे हरे

मन भज गोविन्दम हरे हरे,

सुक सनकादिसिद्ध मुनि नारद,

शिव- बिरंचि नित ध्यान धरे,

मन भज गोविन्दम........

नील सरोरुह श्याम नीलमणि,

मदन मदहरण नीलधरे,

मन भज गोविन्दम........

करुणा सागर नटवर नागर,

नैन मनोहर प्रेम भरे,

मन भज गोविन्दम........

सुमिरत मिटत राग भय तृष्णा,

कलि कलुष भवसिंधु तरे,

मन भज गोविन्दम.......

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।