अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी

मैं तेरा ही बालक हु जगत माहारानी

अब मेरी भी सुनो हे मात भवानी

सिंह सवारी करने वाली तेरी शान निराली है

तू है शारदा, तू ही लक्ष्मी, तू ही महाकाली है

शुंभ-निशुम्भ पापी तूने संघारे,महिषासुर के जैसे तुमने ही मारे

भक्तो के सारे संकट तुमने ही टारे, मै भी हूँ आया मैया तेरे द्वारे

तेरा यश है उज्वल निर्मल जू गंगा का पानी

ब्रह्मा विष्णु शंकर ने भी आध्शक्ति को माना है

जय जगदम्बे जय जगदम्बे वेद पुराण बखाना है

शक्ति से ही सेवा होती, शक्ति से ही मान है

शक्ति से ही विजयी होता हर इंसान है

शक्ति से ही भक्ति होती, भक्ति मे कल्याण माँ

दे दो मुझे भी भक्ति, गाउन गुणगान माँ

कैसे मै गुणगान करूँ, मै तो हूँ अज्ञानी

कण कण मे है देखी सबने कैसे जोत समायी है

भीड़ पड़े जब भक्तो पे माँ दोडी दोडी आई है

मेरी पुकार सुन लो, दर्श दिखा दो,

कर दो दया की दृष्टि, गले से लगा लो

भक्तो का मैया तुमने भाग सवारा,

आया शरण मे लक्खा एक दुखिआरा

कर देवकीनंदन पे ओ मैया मेहरबानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।