मेरी बांह पकड़ लो एक वार

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मेरी बांह पकड़ लो एक वार,

हरि एक वार प्रभु एक वार ॥

यह जग्ग अति गहरा सागर है,

सिर धरी पाप की गागर है ॥

कुछ हल्का करदो इसका भार,

हरि एक वार प्रभु एक वार

एक जाल विछा मोह माया का,

एक धोखा कंचन काया का ॥

मेरा करदो मुक्त विचार,

हरि एक वार प्रभु एक वार

है कठिन डगर मुश्किल चलना,

बलहीन को बल दे दो अपना ॥

कर जाऊं भव मैं पार पार,

हरि एक वार बस एक वार

मैं तो हार गया अपने बल से,

मेरे दोस्त बचाओ जग्ग छ्ल से ॥

सो वार नहीं बस एक वार ॥।,

हरि एक वार प्रभु एक वार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।